बैतूल / आठनेर / शिक्षक में संस्कार और मर्यादा ना, हो तो शिक्षा का पतन निश्चित है ।
*देश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वालो पर आखिर कार्यवाही कब ,,,,,,,*
* आशीष पेंढारकर की रिपोर्ट *
बैतूल = सेहत के लिए मजाक करना बहुत अच्छी बात है… किंतु राष्ट्रीय ध्वज के साथ मजाक करना “देशद्रोह का मामला बनता है” जिस पर दंडात्मक कार्यवाही होना राष्ट्र ध्वज की हित में सम्मानजनक कार्य होगा, यह शायद जिला प्रशासन को ज्ञात नहीं की किस तरह से देश की आन बान और शान संविधान की गरिमा बनाए रखने हेतु गणतंत्र दिवस मनाया जाता है… जो की संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जा रहा था, 75 वा गणतंत्र दिवस… जिसे सरस्वती का मंदिर कहो या शिक्षा के मंदिर में गुरुजन द्वारा शर्मनाक कृत्य किया गया… जिससे जिला प्रशासन की नाकामी साफ तौर पर दिखाई दे रही है, कि कितने प्रतिशत देश हित में कलेक्टर पद की गरिमा का प्रयोग करते हुए, संबंधित शिक्षा विभाग के दोषी शिक्षकों पर कार्यवाही की गई हो, जिससे राष्ट्रध्वज का गणतंत्र दिवस के अवसर पर गंदा एवं भद्दा मजाक या अपमानित करने वालों को एहसास दिला सके, की राष्ट्रीय ध्वज का महत्व क्या है… चुकी दी राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक टाइगर संस्कार नई दिल्ली के प्रदेश महासचिव मध्य प्रदेश, प्रभारी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र श्री नामदेव उबनारे द्वारा जिला कलेक्टर बैतूल को ज्ञापन के माध्यम से मांग की है, कि 26 जनवरी 2024 गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वाले शिक्षकों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाए… चुकी विकासखंड आठनेर की प्राथमिक शाला सुकि में 26 जनवरी 2024 को संस्था प्रमुख द्वारा विधिवत राष्ट्रीय ध्वज फहराने में नियमों की अनदेखी कर, राष्ट्रध्वज का अपमान छात्र-छात्राओं से भरी प्राथमिक शाला में किया गया, इस अपमानजनक कृत्य का समाचार पत्र में भी 30 जनवरी 2024 को प्रमुखता से खबर को प्रकाशित किया गया था… किंतु विकासखंड शिक्षा अधिकारी आठनेर का वरद हस्त होने के कारण मामला आया-गया खत्म कर दिया गया था… उल्लेखनीय है की प्रधान पाठक प्राथमिक शाला सुकि द्वारा आदम कद खंबे के ऊपरी सिरे पर लकड़ी का गता फंसा कर राष्ट्रध्वज फहराने की औपचारिकता भर की गई थी, राष्ट्रीय ध्वज को लोहे या लकड़ी के गिरी में रस्सी के सहारे ना फहराकर लकड़ी के गत्ते में किल के सहारे ठोक दिया गया था, जैसे की फोटो में साफ-साफ दिखाई पड़ रहा है… इस कृत्य के कारण जिले के साथ ही पूरा देश शर्मसार हुआ है… प्राथमिक शाला सुकि के मामले की जांच कर, उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है… सूत्रों का कहना है कि भारतवासी होने के पश्चात भी राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का पता नहीं, कैसे बैतूल जिला शिक्षा विभाग में शिक्षक है यह, भारतवासी, भारतवर्ष के शिक्षा विभाग के प्रधान पाठक को बताता है, कि राष्ट्रध्वज का महत्व क्या है, वहीं जिले में बैठे जिला दंडाधिकारी मौन दिखाई दे रहे हैं, या फिर यह कहे, “गंगा में डुबकी लगाकर तीर्थ किए हजारो, तीरथ करने से क्या होगा, जब तक बदले नहीं अपने विचार” जबकि जिला कलेक्टर का पद के प्रति निर्वाहण तो इस तरह से होना चाहिए कि जिला कलेक्टर के किरदार को ऐसा निभाई की जिला वासियों के साथ ही समस्त देश प्रदेशवासी जैसे इतिहास में सुनहरी अक्षरो मे लिखा हो राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर एक कलेक्टर ने प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक के खानापूर्ति का क्या परिणाम किया… चुकी शासकीय संस्था प्रमुख द्वारा विधिवत राष्ट्रीय ध्वज फहराने में अनदेखी कर देश का गौरव कहे जाने वाले राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया… जिसे जिला कलेक्टर को दी राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक टाइगर संस्थान नई दिल्ली के प्रदेश महासचिव अधिवक्ता नामदेव उबनारे द्वारा ज्ञापन सौपा गया है…
(इनका कहना है )
खंड शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर जानकारी मांगी तो कहा गया मैं छुट्टी पर था, मुझे इस की जानकारी नहीं, अगर दोषी है तो कारवाही निश्चित होनी चाहिए…
( खंड शिक्षा अधिकारी श्री गिहारे, आठनेर )
* आशीष पेंढारकर की रिपोर्ट *
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