मध्य प्रदेश / बैतूल / खनिज अवैध भण्डारण के एक अपराध पर खनिज अपराध के दो प्रकरण।
भण्डारणकर्ता अज्ञात, किसके लिए भण्डारण, कुछ पता नहीं ?
बैतूल। मप्र राज्य। यदि आप नगरिय क्षेत्र के निवासी हैं और आपका कोई प्लाट या कृषि भूमि अन्य किसी ग्रामीण क्षेत्र में स्थित हैं तो हमारी यह खबर आपको सचेत करने वाली हो सकती हैं। खनिज माफिया ग्रामीण क्षेत्र में रिक्त पड़े भू-खण्ड पर खनिज का अवैध भण्डारण कर चले जाते हैं, अवैध भण्डारण को बाद में खनिज माफिया रफा दफा भी कर देते हैं लेकिन कानूनी मुसीबत भूमि स्वामी के लिए खड़ी हो जाती हैं। अज्ञात खनिज अपराधियों का पता लगाने में नाकाम खनिज निरीक्षक भूमि स्वमी पर ही अपराध मढ़ देते हैं और लाखो रूपए अर्थदण्ड का नोटिस खनिज विभाग भू-खण्ड स्वामी को थमा देता हैं। खनिज विभाग में एैसा भी होता हैं कि 02 वर्ष पूर्व जिस अवैध भण्डारण पर एक मुकदमा चल चुका हैं 02 वर्ष बाद उसी जप्तशुदा खनिज पर खनिज निरीक्षक खनिज अपराध के दस्तावेज तैयार कर लेता हैं और खनिज विभाग अर्थदण्ड राशि का मांग सूचना पत्र थमा देता हैं। पहले कोई अवैध भण्डारण करने वाला व्यक्ति था तो अब कोई दूसरा हैं।
खनिज विभाग बैतूल में पदस्त रह चुकी पूर्व खनिज निरीक्षक पिंकी चौहान द्वारा ग्राम खैरवानी में 13.11.2019 को भू-खण्ड क्र0 46/3 पर खनिज रेत 520 धनमीटर का अवैध भण्डारण का मामला अनिकेत सिंह के विरूद्ध दर्ज किया गया था। न्यायालय कलेक्टर बैतूल द्वारा रा0प्र0क्र0 136/अ-67/2019-20 दर्ज कर सुनवाई की गई थी। सुनवाई के दौरान गवाहों के ब्यान दर्ज किए गए और निराकरण किया गया था।
खनिज निरीक्षक बी0 के0 नागवंशी द्वारा उक्त भूखण्ड क्र0 46/3/2 पर खनिज रेत का अवैध भण्डारण 01.12.2022 को 402 घनमीटर खनिज जप्त कर लिया जाता हैं और भू-खण्ड धारक संजय सिंह पर खनिज के अवैध भण्डारण का मुकदमा दर्ज कर लिया जाता हैं। सूत्र बताते हैं कि यह वही पूर्व जप्तशुदा खनिज का भण्डारण हैं जिसे पिंकी चौहान द्वारा जप्त किया गया था जिसका निराकरण न्यायालय कलेक्टर बैतूल द्वारा किया जा चुका था। यदि यह बात सच हैं तो खनिज निरीक्षक को विभागीय जांच का सामना भी करना पड़ सकता हैं।
खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की धारा 22 में परिवाद पत्र विशेष न्यायालय में पेश किया जाना अभी तक बाकी हैं। खनिज विभाग बैतूल द्वारा धारा 23 (क) के तहत आरोपी को प्रशमन का अवसर दिया जा रहा हैं तो कि अभियोजन संस्थित करने के पूर्व दिया जाना कानूनी रूप से आवश्यक हैं। यदि आरोपी 15 लाख 09 हजार 390 रू0 सरकारी खाता में जमा कर देता हैं तो विभाग आगे कोई कार्यवाही नहीं करेगा।
खनिज निरीक्षक पर उपेक्षा एवं लापरवाही पूर्वक खनिज अपराध की जांच का आरोप लगता हैं तो यह गलत भी नहीं हैं। निजी भूमि पर तलाशी लेने के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 100 का पालन करना आवश्यक होता जैसा कि अधिनियम 1957 की धारा 23 (ख) में दिया गया हैं। मप्र खनिज नियम 2022 के नियम 23 एवं 24 का पालन करना आवश्यक हैं। खनिज अपराध की जांच के नाम पर खनिज निरीक्षक ने मात्र पंचनामा, जप्तिनामा और सुपुर्दगी नामा तैयार कर लिया हैं। खनिज नियम 2022 के नियम 18 में यह पता लगाना आवश्यक हैं कि अवैध भण्डारण किसने किया हैं? किसके लिए किया गया हैं? क्षेत्र विशेष में खनिज माफिया सक्रिय है जो किसी कि भी रिक्त पड़ी भूमि पर खनिज का भण्डारण कर देता हैं जिसका पता लगाने की खनिज विभाग जहमत ही नहीं उठाता हैं। वैधानिक दायित्व पूरा करने में नाकाम खनिज निरीक्षक भूमि स्वामी को अवैध भण्डारण करने वाला बता कर प्रकरण पेश कर देते हैं जिसे राजस्व न्यायालय सही मान भी लेती हैं और भारी भरकम अर्थदण्ड ठोक देती हैं। राजस्व न्यायालय के फैसले अक्सर विधि, न्याय एवं मानवाधिकारो के सवालो की जद् में आ जाते हैं।
खनिज अपराध की जांच में गवाहो के कथन दर्ज करना, नपाई का पंचनामा तैयार करना, स्थल का पंचनामा तैयार करना, वीडियोंग्राफी तैयार करना, फोटो ग्राफी करना शामिल होता हैं। खनिज भण्डारण की नपाई पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं क्योंकि खनिज निरीक्षक माईनिंग इंजिनियर नहीं होते हैं, इसलिए नपाई कर पाना इनके बस की बात ही नहीं हैं। खनिज अपराध के प्रकरण में नपाई की वीडियोग्राफी एवं नपाई का गणितीय सूत्र मामलो में अक्सर पेश नहीं किए जाते हैं। अन्य मामलों की तरह संजय सिंह पिता राजेन्द्र सिंह के मामले में भी यही स्थिति हैं लेकिन न्यायदान के मामलों में राजस्व न्यायालय का इतिहास बेहद खराब रहा हैं।
खनिज अपराध के विशेषज्ञ अधिवक्ता भारत सेन बताते हैं कि खान एवं खनिज अधिनियम 1957 में खनिज निरीक्षक एक पुलिस अधिकारी होता हैं जिसे अपराध अनुसंधान में दण्ड प्रक्रिया संहिता का पालन करना होता हैं। यदि पूर्व में जप्तशुदा खनिज पर ही पुनः खनिज अपराध दर्ज कर लिया गया हैं तो यह एक गंभीर मामला हैं। अधिनियम 1957 की धारा 21 (4-क) में जप्तशुदा खनिज का निराकरण अपराध का विचारण करने वाली धारा 30 (ख) में गठित विशेष न्यायालय के आदेश से किया जा सकता हैं। खनिज विभाग के पास विशेष न्यायालय का आदेश होना चाहिए तभी वह कथित भण्डारण स्थल पर अवैध भण्डारण को जायज ठहरा सकेगा।
* आशीष पेंढारकर की रिपोर्ट *
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