हरदा / पीपलपानी पटाखा फैक्ट्री में चल रही मनमर्जी बारूद ओर मजदूरों का रिकार्ड में नहीं हवाला ।
हरदा जिले की आखिरी सीमा पर पटाखे का अवैध कारोबार जोरों से फल-फूल रहा है यहां पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है चर्चा है कि स्थानीय अधिकारियों की सांठगांठ से कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जिससे की अंकुश लग सके ।
पीपलपानी में हो चुकी मजदूर की मौत
पूर्व में एक मजदूर की मौत हो चुकी जिसका प्रकरण न्यायालय में चल रहा है मृतक परिवार ने श्रम विभाग नर्मदा पुरम में एक प्रकरण दर्ज किया जिसके फैसले में 17 लाख का हर्जाना देने के आदेश हो चुके हैं लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ ओर तहसीलदार के यहां पुनः प्रकरण चल रहा।
पीपलपानी में घटना हुई तब राजेश अग्रवाल लायसेंसी थे लेकिन बाद में लायसेंस सेटिंग से बदल दिया गया जो जांच का विषय है।
हरदा जिलाधीश की लापरवाही के चलते मृतक परिवार को मुआवजा आज तक नहीं मिला जबकि पूर्व में विभिन्न संगठनों ने ज्ञापन धरना दिया
लायसेंस की आड़ में ठेकेदार सक्रिय
पीपलपानी में कितने मजदूर काम करते हैं इसकी जानकारी प्रशासन के पास नहीं है जबकि हर मजदूरों की जानकारी होनी चाहिए जगह-जगह जहां काम होता है कैमरे अनिवार्य होना चाहिए लेकिन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है
कच्चा माल का स्टाक कहां है बने पटाखें की पैकिंग कहा होती है आदि व्यवस्था पीपलपानी में नहीं है मजदूरों की संख्या नावलिग आदि की शिकायत को स्थानीय प्रशासन अनदेखी करता है जबकि समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण हरदा की टीम को हर पन्द्रह दिन में करनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
अधिकारी की सांठगांठ जग जाहिर है
पीपलपानी सहित विभिन्न जगह-जगह बन रहे पटाखे की शिकायत करो तो फेक्ट्री संचालक को सूचना देने के बाद पहुंचते हैं ओर दिखावा कार्रवाई करते हैं।
पीपलपानी को लेकर लगातार समाचारों पत्रों में नावलिग मजदूरों को लेकर शिकायत हो रही है अब कमिश्नर को टीमें भेजकर पटाखे वालों की फेक्टरी की जांच हर पन्द्रह दिन में विभिन्न बिंदुओं पर की जाना चाहिए हर फेक्ट्री में जहां मजदूरों से काम होता है अनिवार्य रूप से कैमरे लगाये जाय ओर बीट प्रभारी स्थानीय पुलिस समय-समय पर चैक करें कि कैमरे चालू है या नहीं ।
*आशीष पेंढारकर की रिपोर्ट*
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