डिजिटल अरेस्ट क्या है? साइबर ठगी का नया खतरनाक तरीका, ऐसे बचें.
डिजिटल अरेस्ट क्या है? साइबर ठगी का नया खतरनाक तरीका, ऐसे बचें
देश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में “डिजिटल अरेस्ट” नाम की नई ठगी लोगों को निशाना बना रही है। ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और पैसों की मांग करते हैं।
क्या है डिजिटल अरेस्ट?
“डिजिटल अरेस्ट” असल में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह साइबर अपराधियों द्वारा बनाया गया एक डराने वाला जाल है।
ठग फोन या वीडियो कॉल कर कहते हैं कि:
आपका आधार/पैन गलत काम में इस्तेमाल हुआ है
आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस है
आपका पार्सल ड्रग्स के साथ पकड़ा गया है
इसके बाद वे कहते हैं कि “आपको ऑनलाइन निगरानी में रखा गया है” यानी डिजिटल अरेस्ट।
कैसे करते हैं ठगी?
1️⃣ फर्जी आईडी और यूनिफॉर्म में वीडियो कॉल
2️⃣ डराने-धमकाने वाली भाषा
3️⃣ बैंक डिटेल्स और OTP की मांग
4️⃣ “केस से बचाने” के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराना
किन लोगों को बनाते हैं निशाना?
बुजुर्ग
छात्र
नौकरीपेशा लोग
अकेले रहने वाले लोग
ऐसे बचें डिजिटल अरेस्ट से
✅ याद रखें – भारत में कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
✅ कभी भी OTP, बैंक डिटेल या पर्सनल जानकारी साझा न करें।
✅ घबराएं नहीं, कॉल तुरंत काट दें।
✅ तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
✅ नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
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