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बदलते दौर में रक्षाबंधन का महत्व : बदायूं में उत्साह



रक्षाबंधन 2025: भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व

बदायूं, उत्तर प्रदेश।
रिश्तों की मिठास और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। बदायूं जिले के गांवों और शहरों में भी यह पर्व उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, मिठाई खिलाई और भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना की। बदले में भाइयों ने बहनों को उपहार और सुरक्षा का वचन दिया।

पारंपरिक रंग और बाजारों की रौनक

त्योहार से पहले ही बाजारों में रौनक देखने लायक थी। राखियों की दुकानों पर भीड़, मिठाइयों की महक और रंग-बिरंगे सजावटी सामान ने हर गली को त्योहार के रंग में रंग दिया। शहर के मुख्य बाजार, कादरचौक, उसहैत और बिल्सी में रात देर तक खरीदारी चलती रही।

ग्रामीण इलाकों में विशेष उत्सव

कादरचौक समेत जिले के कई गांवों में सामूहिक रक्षाबंधन समारोह आयोजित हुए, जहां महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजधजकर पहुंचीं और एक-दूसरे के भाइयों को भी राखी बांधकर आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

बदलते दौर में रक्षाबंधन का महत्व

आज के बदलते समय में रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रिश्तों में आपसी विश्वास, सम्मान और सुरक्षा का संदेश देता है। कई जगहों पर बहनों ने पुलिसकर्मियों, सेना के जवानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी राखी बांधकर उनके त्याग और सेवा को सलाम किया।

बच्चों और युवाओं में उत्साह

स्कूल-कॉलेजों में भी रक्षाबंधन की झलक देखने को मिली। बच्चों ने कागज़ और कपड़े से खुद राखियां बनाई और उन्हें अपने भाइयों को समर्पित किया। युवाओं ने सोशल मीडिया पर शुभकामना संदेश, फोटो और वीडियो के जरिए इस पर्व की खुशी साझा की।


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रक्षाबंधन हमें यह सिखाता है कि रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सम्मान से बनते हैं।
यह पर्व आने वाली पीढ़ियों को भी रिश्तों की इस खूबसूरत डोर को मजबूती से थामे रखने की प्रेरणा देता है।

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