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हैंडपंप मरम्मत के नाम पर कितना खर्च? ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत की जांच जरूरी.


हैंडपंप मरम्मत के नाम पर कितना खर्च? ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत की जांच जरूरी

ग्राउंड रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

गांवों में पेयजल की सुविधा बनाए रखने के लिए हैंडपंपों की मरम्मत पर ग्राम पंचायतों द्वारा खर्च किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि मरम्मत के नाम पर खर्च की गई रकम के अनुसार क्या वास्तव में हैंडपंप ठीक भी किए गए हैं?

इसकी सच्चाई जानने के लिए ग्राम पंचायत के भुगतान रिकॉर्ड, मरम्मत संबंधी बिल, कार्य विवरण और गांव में लगे हैंडपंपों की वास्तविक स्थिति का मिलान करना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक पुरानी ऑडिट रिपोर्ट में भी हैंडपंपों के रखरखाव पर खर्च के सत्यापन से जुड़ी कमियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में 2011 से 2016 के दौरान जांची गई 166 ग्राम पंचायतों में 13,961 हैंडपंपों के रखरखाव पर लगभग 3.83 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित पंचायतों में भुगतान की वास्तविकता सत्यापित करने के लिए आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। यह पुराना ऑडिट निष्कर्ष है, किसी वर्तमान ग्राम पंचायत के खिलाफ आरोप का प्रमाण नहीं।


अब सवाल यह है कि संबंधित ग्राम पंचायत में हैंडपंप मरम्मत के लिए कितनी राशि निकाली गई, कितने हैंडपंपों की मरम्मत दिखाई गई और कितने हैंडपंप आज भी खराब पड़े हैं? इन सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

जांच के मुख्य बिंदु:

- हैंडपंप मरम्मत के नाम पर कुल कितना भुगतान हुआ?
- किन हैंडपंपों की मरम्मत दिखाई गई?
- मरम्मत के बिल और भुगतान वाउचर उपलब्ध हैं या नहीं?
- गांव में कितने हैंडपंप चालू और कितने खराब हैं?
- खर्च और वास्तविक काम में कोई अंतर है या नहीं?

इन बिंदुओं की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगा कि खर्च के अनुरूप काम हुआ है या मामले में आगे जांच की जरूरत है।

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